मिर्ज़ा ग़ालिब
मेहरबां होके बुला लो मुझे : मिर्ज़ा ग़ालिब मेहरबां होके बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्तमैं गया वक़्त नहीं हूँ के फिर आ भी न सकूँ। ज़ोफ़ में तान:-ए-अग़यार का शिकवा क्या हैबात कुछ सर तो नहीं है कि उठा भी न सकूँ ? ज़हर मिलता ही नहीं मुझको सितमगर वर्न:क्या क़सम है तेरे मिलने की कि
